Aamacha Vidarbha Aamacha Vidarbha Author आमचा विदर्भ न्यूजचे संस्थापक संपादक दीपक शर्मा हे २००८ पासून पत्रकारिता क्षेत्रात कार्यरत असून त्यांनी विविध दैनिके आणि वृत्त माध्यमांमध्ये काम करताना सामाजिक, शैक्षणिक, कामगार, ग्रामीण आणि जनसामान्यांच्या प्रश्नांवर सातत्याने लेखणी चालविली आहे. वर्ष २०१५ पासून त्यांनी डिजिटल पत्रकारितेच्या माध्यमातून वेगवान, तटस्थ आणि जनहिताच्या बातम्या जनतेपर्यंत पोहोचविण्याचे कार्य सुरू ठेवले आहे. सामाजिक माध्यमे आणि ऑनलाइन न्यूज प्लॅटफॉर्मच्या माध्यमातून त्यांनी अनेक स्थानिक प्रश्न प्रशासनापर्यंत पोहोचविले आहेत. त्यांच्या पत्रकारितेचा केंद्रबिंदू नेहमीच सर्वसामान्य नागरिक, शेतकरी, कामगार, विद्यार्थी आणि ग्रामीण भागातील समस्या राहिल्या आहेत. शिक्षण, आरोग्य, पर्यावरण, सामाजिक न्याय आणि प्रशासनातील त्रुटींवर त्यांनी सातत्याने वृत्तांकन केले आहे. पत्रकारिता ही केवळ बातमी देण्याचे माध्यम नसून समाजातील सत्य परिस्थिती लोकांसमोर आणण्याची जबाबदारी आहे, या भूमिकेतून त्यांचे कार्य अविरत सुरू आहे. निष्पक्ष, जनजागृतीपर आणि समाजाभिमुख पत्रकारितेमुळे त्यांची ओळख निर्माण झाली आहे.
Title: माणिकगड रेलवे रिजर्वेशन काउंटर पर दलालों का कब्जा
Author: Aamacha Vidarbha
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यात्री कतार में, दलाल बैक डोर से चलाता है खेल प्रति टिकिट अतिरिक्त पांच सौ से एक हजार जा रहे वसूले हलाकान यात्रियों ने की रेल मंत्रालय को ऑन...
यात्री कतार में, दलाल बैक डोर से चलाता है खेल
प्रति टिकिट अतिरिक्त पांच सौ से एक हजार जा रहे वसूले
हलाकान यात्रियों ने की रेल मंत्रालय को ऑनलाइन शिकायत
आमचा विदर्भ - कार्यालय प्रतिनिधि
राजुरा -
        यदि आप माणिकगड रेलवे स्टेशन के रिजर्वेशन काउंटर पर तत्काल का टिकट बनवाने जा रहे हैं तो हो सकता है कि आप लाइन में ही लगे रहें और दलाल टिकट बनवा ले जाएं। दरअसल माणिकगड रेलवे स्टेशन के रिजर्वेशन काउंटर पर दलालों की सक्रियता के कारण आम लोगों के लिए टिकट बनवाना मुश्किल हो गया है। दलालों की वजह से आम लोग लाइन में ही लगे रहते हैं और दलाल काउंटर के अंदर जाकर टिकिट बनवाने वाले के बगल में खडे होकर एक साथ कई टिकट बनवा लेते हैं।

        दिवाली की छुट्टियों के चलते इन दिनों रेलवे स्टेशन पर रिजर्वेशन टिकट लेने वालों की संख्या बढ़ गई है। यात्रियों की संख्या बढऩे से दलाल भी अधिक सक्रिय हो गए हैं। स्टेशन पर स्थिति यह है कि आम लोग तो घंटों लाइन में लगे रहते हैं और टिकट नहीं बनवा पाते। वहीं दलाल काउंटर के अंदर से ही एक साथ कई टिकट बनवा रहे हैं। मजबूरी में लोग इन दलालों से ही संपर्क कर टिकट बनवाते हैं और अतिरिक्त रुपए लेकर यह दलाल इन्हें टिकट दिलवा देते हैं। लोगों का कहना है कि इस काम में रेलवे के कई कर्मचारी भी मिले हुए हैं। तत्काल टिकटों से दलालों की पहुंच को दूर रखने का रेलवे बेशक दावा करे। लेकिन स्थानीय स्तर पर विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से लोगों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। दलाल, आरक्षणकर्मी एवं आरपीएफ की सांठगांठ से यहां पूरा खेल धड़ल्ले से चल रहा है।
बैक डोर से चलता है खेल
        काउंटर पर सक्रिय दलाल बैक डोर से पूरा खेल चलाते हैं। हालांकि स्थानीय दलाल 10-10 फॉर्म लेकर एकसाथ पीछे के रास्ते आरक्षण केंद्र पर आ जाता है और अंदर बैठे आरक्षण इंचार्ज को हाथ में पकड़ा कर उसके बगल में खड़े होकर तत्काल का काउंटर खुलते ही टिकिट बनवाता है. आरक्षण करने वाला कर्मचारी काउंटर के सामने लगे यात्रियों के टिकट के बीच में ही दलालों का टिकट बनाते हैं। सूत्रों की मानें तो पर आरक्षण इंचार्ज की जेब में भी भ्रष्ट्राचार रूपी पैसा जाता है। खुद कांउटर पर कतार में लगे लोग दलालों के इस खेल को बखूबी देखते रहते है। आज जब काजीपेट-पुणे एक्सप्रेस की तत्काल टिकिट की बुकिंग के लिए सैंकड़ो छात्र एंव अभिभावक माणिकगड रेलवे स्टेशन पहुंचे तो जिन्होंने दलाल से संपर्क किया उनके टिकिट बन गये जो कतार में लगे उन्हें नो रूम का जबाब सुनकर मायूस लौटना पडा. लौटानेवालों में दर्जनों छात्राएं भी थी. 
छात्रों ने बनाया व्हिडिओ 
        दलाल जब कांउटर के अंदर से आरक्षण इंचार्ज के बगल में खडा होकर टिकिट बनवा रहा था तो कुछ छात्रों ने उसका व्हिडिओ बनाकर सोशल मिडिया में वायरल कर दिया. जिसमें साफ देखा जा रहा है की दलाल किस तरह आरक्षण इंचार्ज के बगल में खडा होकर उसे दिशा निर्देश दे रहा है. इसकी शिकायत भी रेल मंत्रालय, रेलवे के विजिलेंस को की गई है. अब देखना है सबंधित विभाग क्या करवाई करता है. कुछ लोगो ने इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस स्टेशन के प्रभारी थानेदार एस.व्ही. दरेकर को भी दी. 

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