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- वेकोलि बल्लारपुर महाप्रबंधक कार्यालय को सुब्बई के प्रकल्पग्रस्तों ने जड़ा ताला
- सैंकड़ो प्रकल्पग्रस्त महिला एंव बच्चों के साथ बैठे चिलचिलाती धुप में मुख्य द्वार पर
- द्वार बंद महाप्रबंधक कार्यालय के सैंकड़ो अधिकारी एंव कर्मचारी गेट के बाहर पेड़ के निचे खडे
आमचा विदर्भ - ब्यूरो रिपोर्ट्स
राजुरा -
वेकोलि बल्लारपुर क्षेत्र के अंतर्गत सुब्बई-चिंचोली परियोजना 12 साल से लंबित है. इस परियोजना के लिए जिन 205 किसानों की जमीन अधिग्रहित की जा चुकी है, उनके रोजगार अभी भी लंबित हैं और इस परियोजना के लिए लगभग 40 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया है. परियोजना प्रभावित लोगों का धैर्य आज जवाब दे गया. सुब्बई-चिंचोली परियोजना प्रकल्पग्रस्तों ने वेकोलि बल्लारपुर महाप्रबंधक कार्यालय को सुबह ९ बजे के दरम्यान ताला जड़ दिया एंव मुख्य द्वार पर ही धरने पर बैठ गए. प्रकल्पग्रस्तों ने 'आमचा विदर्भ' को बतलाया की गत ५ दिनों से महाप्रबंधक कार्यालय के सामने सुब्बई-चिंचोली परियोजना के प्रकल्पग्रस्त आंदोलन कर रहे है लेकिन वेकोलि के किसी अधिकारी ने इसकी सुध नहीं ली जिस वजह से उन्हें ताला जड़ना पड गया.
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| पेड़ के निचे खड़ा सीजीएम कार्यालय का पूरा स्टाफ |
ताला जड़ते ही मचा हड़कंप
प्रकल्पग्रस्तों द्वारा सीजीएम कार्यालय को ताला जड़ देने से वेकोलि अधिकारीयों में हड़कंप मच गया. सीजीएम कार्यालय में काम करने वाले अधिकारी एंव कर्मचारियों को गेट के बाहर ही पेड़ के निचे खड़ा रहना पड़ा. प्रकल्पग्रस्त वेकोलि प्रशासन के विरोध में नारेबाजी कर रहे थे. आंदोलन का पता चलते ही सीजीएम कार्यालय के पास पुलिस बंदोबस्त बढ़ा दिया गया है. वेकोलि अधिकारी जी. पुल्लैया एंव पुलिस अधिकारी प्रकल्पग्रस्तों को समझाने का प्रयास करते रहे लेकिन प्रकल्पग्रस्त सीजीएम के साथ मुलाकात पर अड़े रहे.
परियोजना प्रभावित किसान संघर्ष समिति की और से फ़रवरी माह में ही आंदोलन के संदर्भ में वेकोलि प्रबंधन को बता दिया गया था. लेकिन वेकोलि प्रबंधन ने इसे हलके में लिया. आंदोलन में रोशन गौरकार, अनिल लोखंडे, अभिषेक कुरवडकर, शरद चापले, संजय काले, बापूजी झाडे, वच्छलाबाई झाडे, अल्काबाई चौधरी, पूजा चापले एंव सैंकड़ो प्रकल्पग्रस्त उपस्थित रहे. प्रकल्पग्रस्तों के आंदोलन में पूर्व जिप सदस्य अविनाश जाधव, शिवसेना के उप तालुका प्रमुख रमेश झाडे, युवासेना तालुका अध्यक्ष बंटी उर्फ अमित मालेकर ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.
ये हैं परियोजना पीड़ितों की मांगें
- एक सातबारा पर एक नौकरी.
- किसानों को गुमराह कर मंत्रालय में डिनोटिफिकेशन के लिए भेजा गया प्रस्ताव डिनोटीफाईड नहीं करने का लिखित पत्र मंत्रालय एंव प्रकल्पपीड़ितों को दिया जाना चाहिए.
- चिंचोली रीकास्ट प्रोजेक्ट के 205 परियोजना प्रभावित लोगों को शीघ्र ही नौकरी देने और अधिग्रहित कृषि भूमि के मुआवजे की मांग की गई है.
- हालांकि चिंचोली परियोजना के तहत धारा 11 के तहत जमीन का अधिग्रहण किया गया है, लेकिन इसे रोजगार और रोजगार से वंचित रखा गया है.
- परियोजना के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन वेकोलि ने स्व-इच्छुक रोजगार और वित्तीय मुआवजे की एक समय लेने वाली नीति अपनाई हुई है.
ज्ञात हो की, दिसंबर-जनवरी में नागपुर के संविधान चौक पर इन प्रकल्पग्रस्तों द्वारा आंदोलन किया गया था, लेकिन कुछ बाहरी तथाकथित लोभी राजनीतिक नेताओं ने दावा किया कि उनकी सभी मांगें पूरी हो गई हैं, उन्होंने आंदोलन को बाधित कर दिया और प्रकल्पग्रस्त किसानों को धोखा दिया था.










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