पर्यावरणपूरक झांकी में धर्म, प्रकृति, राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय एकता का सुंदर संगम
आमचा विदर्भ - दीपक शर्मा
राजुरा (दि. 24 सितंबर 2026) -
गणेशोत्सव केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव, सांस्कृतिक एकता, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रप्रेम का संदेश देने वाला उत्सव भी बन सकता है। इसका सुंदर उदाहरण राजुरा के राजस्थानी समाज के वरिष्ठ नागरिक एवं प्रसिद्ध व्यवसायी नारायणप्रसाद झंवर परिवार द्वारा साकार की गई घरेलू गणेश सजावट में देखने को मिल रहा है।
इस वर्ष झंवर परिवार ने गणेश सजावट के माध्यम से सुवर्ण मंदिर, अमृत सरोवर, शिवदुर्ग, तिरंगा और हरियाली का सुंदर संगम प्रस्तुत किया है। इस आकर्षक झांकी के माध्यम से सर्वधर्मसमभाव, राष्ट्रीय एकता, प्रकृति संरक्षण और देशप्रेम का पवित्र संदेश दिया गया है। इस सजावट की विशेषता यह है कि इसमें ऐसी अनेक वस्तुओं का रचनात्मक उपयोग किया गया है, जिन्हें सामान्यतः उपयोग के बाद कचरे में फेंक दिया जाता है। छत्रपति शिवाजी महाराज के शिवदुर्ग की प्रतिकृति बनाने के लिए माचिस की खाली डिब्बियों का उपयोग किया गया है। वहीं माचिस की तीलियों से किले का परकोटा तैयार किया गया है। इससे ‘वेस्ट से बेस्ट’ की संकल्पना के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी प्रभावी ढंग से सामने आता है।
सुवर्ण मंदिर और अमृत सरोवर से शांति का संदेश
झंवर परिवार की गणेश सजावट का सबसे आकर्षक हिस्सा अमृतसर स्थित सुवर्ण मंदिर की प्रतिकृति है। सर्वधर्मसमभाव और भाईचारे के प्रतीक के रूप में सुवर्ण मंदिर को अत्यंत सुंदर ढंग से साकार किया गया है। इसके नीचे अमृत सरोवर की प्रतिकृति भी बनाई गई है। अमृत सरोवर के पानी में सुवर्ण मंदिर की दिखाई देने वाली प्रतिबिंब छवि इस पूरे दृश्य को आध्यात्मिक और मनोहारी स्वरूप प्रदान करती है। पानी में दिखाई देता यह प्रतिबिंब शांति, पवित्रता, भाईचारे और मानवता की भावना का संदेश देता है। धार्मिक विविधता के बीच आपसी सद्भाव और एकता की भावना को इस झांकी में सहज एवं प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया है।
हरियाली के बीच लहराता तिरंगा
सजावट के दूसरे हिस्से में बांस की टोकरी में उगाए गए अनाज के जव्हार से हरियाली का सुंदर वातावरण तैयार किया गया है। इसी हरी-भरी प्राकृतिक पृष्ठभूमि में गर्व के साथ लहराता तिरंगा विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। तिरंगा इस बात का संदेश देता है कि भारत विभिन्न धर्मों, भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं से मिलकर बना एक राष्ट्र है। देश की विविधता ही उसकी शक्ति है और सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना ही राष्ट्रीय एकता का मूल भाव है। इसके साथ ही हरे-भरे पौधों के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया है कि प्रकृति की समृद्धि और पर्यावरण का संरक्षण देश की वास्तविक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार है।
भक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कचरे में जाने वाली वस्तुओं का पुनः उपयोग कर तैयार की गई यह गणेश सजावट केवल देखने में आकर्षक नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी पैदा करती है। गणेशोत्सव जैसे बड़े धार्मिक पर्व में पर्यावरणपूरक सजावट को बढ़ावा देने की आवश्यकता के बीच झंवर परिवार की यह पहल एक रचनात्मक संदेश प्रस्तुत करती है। माचिस की खाली डिब्बियों और तीलियों से साकार किया गया शिवदुर्ग, बांस की टोकरी, प्राकृतिक हरियाली और अन्य पुनः उपयोग योग्य सामग्री से तैयार की गई कलाकृतियां भक्ति, संस्कृति, प्रकृतिप्रेम, सर्वधर्मसमभाव और राष्ट्रप्रेम का सुंदर संगम प्रस्तुत करती हैं।
दो महीने पहले से शुरू होती है तैयारी
नारायणप्रसाद झंवर परिवार के घर गणेशोत्सव के अवसर पर हर वर्ष अलग-अलग संकल्पनाओं पर आधारित आकर्षक सजावट और झांकी साकार की जाती है। इसके लिए परिवार के सदस्य गणेश चतुर्थी से लगभग दो महीने पहले ही तैयारियां शुरू कर देते हैं। दिनभर व्यवसाय संभालने के बाद रात देर तक गणेश सजावट के कार्य में परिवार के सदस्य जुटे रहते हैं। संकल्पना तय करने से लेकर आवश्यक सामग्री जुटाने, निर्माण और सजावट को अंतिम रूप देने तक विभिन्न चरणों में लगातार मेहनत की जाती है। दो महीने की इस मेहनत के बाद तैयार होने वाली झांकी केवल सजावट नहीं रहती, बल्कि परिवार की सामूहिक मेहनत, रचनात्मकता और विघ्नहर्ता के प्रति श्रद्धा का प्रतीक बन जाती है।
हर वर्ष हजारों श्रद्धालु लेते हैं गणराय के दर्शन
झंवर परिवार के घर गणेशोत्सव के दौरान साकार की जाने वाली आकर्षक सजावट देखने के लिए राजुरा और आसपास के क्षेत्र से हर वर्ष हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालु गणराय के दर्शन करने के साथ ही झांकी की कलात्मकता और उसके माध्यम से दिए जाने वाले संदेश की सराहना करते हैं। इस वर्ष सुवर्ण मंदिर, अमृत सरोवर, शिवदुर्ग, तिरंगा और हरियाली के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय एकता का संदेश प्रस्तुत किया गया है।
विघ्नहर्ता के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हुए समाज में प्रेम, शांति, भाईचारा और एकता की भावना मजबूत हो तथा प्रकृति के संरक्षण की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक समझे, यही पवित्र और मार्मिक संदेश नारायणप्रसाद झंवर परिवार की इस पर्यावरणपूरक गणेश सजावट से मिलता है।
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